शब्द

किताबो के संसार ने
उलझा दिया है शब्दों को
नोच,खरोच अल्फाजो को
बिखेर दिया है सबको
आज़ान की आवाज़ के साथ
आजाद हुए थे शब्द
ढेर सारे भाषण में ढुलमुला रहे थे
शब्द
कही तवे पर रोटियों से सेके जा रहे थे
शब्द
कहीं उस रोटी के संग निगले जा रहे
शब्द
भूख की ऐठन में पनप रहे थे 
शब्द
शाम मेरी कश्ती संग बह गए
शब्द







































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